Saturday, January 6, 2007

chaahati hun jeena astya ko..


चाहती हुं जीना एक बार असत्य को.. मानना चाहती हुं उसे जो हुं उसे जो है नहीं... देखना चाहती हुं उसे जो प्रत्यक्ष नहीं परोक्ष है..एक बार जाना चाहती हुं उस पार जहां विश्वास कर सकुं उन कल्पनाओं का जो कभी पूरी होती नहीं...तुम मुझे वहीं मिलो उस पार और सफर करें हम ख्वाबों का..सुनना चाहती हुं तुमसे वो शब्द जो हकीकत हॅ नहीं.. फिर भी विश्वास करना चाहटी हुं तुम्हारा.. एक बार जीना चाहती हुं असत्य कॉ.. गाना चाहती हुं उन गीतॉ को जो किसी ने लिखे थे कभी दिल के तारों पर गाने के लिये .. देना चाहती हुं उन्हॅ सुर हृदय के.. सुर जो खो दिये थे कभी .. ढ़ुंढ्ना चाहती हुं उन्हॅ तुम्हारे संग... एक बार जीना चाहती हुं असत्य को.. छुना चाहती हुं उस स्पर्श को जिसने कभी छुआ ही नहीं ... मह्सूस करना चाहती हुं उस कोमल अहसास को अपने बालॉ मॅ, अपने गालों पर..एक बार जीना चाहती हुं असत्य को... सोना चाहती उस नींद में जो कभ इन आंखॉ मॅ उतरी ही नहीं.. तुम्हारी गोद मॅ अपनी पलकॅ मूंद कर खो जाना चाहती हुं उस चिरनिद्रा मॅ... और चाहती हुं वो रात जो कभी ढले नहीं... बस एक बार ऐसा हो... हां जीना चाहती हुं एक बार असत्य को..

2 comments:

divyabh aryan said...

chaahti hoo jinaa mai astya ko-- kahaa to tik magar ji rahi ho astye me aur jo chaahti ho wohi to sabsa bada satya hai.jise kayi karno se khonaa pada wo satya hi tha aur jo hum ji rahe hai wo maatra asatya kyo ki dil se jinaa hi jinaa hai.But this one is ur natural flow n very expressive.

manya said...

ya adivya now u got me.. ths wat i wanted to say ki wat we want s truth of life but we can nvr get that.. that s that s a myth a dream tht will nvr be satiated..hence i said chaahati hun jeena asatya ko.. n yes we r living in fake world n think this s truth.. so the controversial title.. thnx for understanding..