Wednesday, March 28, 2007
Saturday, March 24, 2007
ऐ मेरे दोस्त... कैसे करूं तेरा शुक्रिया...
कैसे करूं मैं तेरी दोस्ती का हक अदा...
ऐ मेरे दोस्त!.. मैं कैसे करूं तेरा शुक्रिया...
कड़कती धूप में जल रही मेरी ज़िंदगी...
तुम लेके आये प्यार का घना साया..
मुझे जो रखा पलकों की छांव तले...
ऐ मेरे दोस्त!... मैं कैसे करूं तेरा शुक्रिया...
अंधेरी, सीली फ़िज़ां में घुटता दम मेरा...
सहमी सांसें, खोई थी रोशनी कहीं...
तुम बन के आये खुशी का उजियारा..
खुद को जला के किया जो मुझे रोशन..
ऐ मेरे दोस्त!.. मैं कैसे करूं तेरा शुक्रिया..
डरी, सहमी मैं अकेली.. बिल्कुल तन्हा....
साथी भी सारे बन गये अजनबी...
ऐसे में तुमने साया बन साथ निभाया...
भूल के अपनी तन्हाई जो बने मेरे साथी...
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1:55 PM
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Labels: चंद ख्वाहिशें.... दिल की..
Tuesday, March 20, 2007
रात ने जो पाया संग तेरा.......
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9:20 PM
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Labels: love is in the air..
Evening and Me...........
Me watching the evening sun................... the dazzling light turning up to dim orange and now the sky was becoming grey n slowly more darker...........
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5:47 PM
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Labels: some posts in English..
Friday, March 16, 2007
AJNABI SAATHI....
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9:33 PM
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Labels: चंद ख्वाहिशें.... दिल की..
Wednesday, March 14, 2007
कहां समझता है कोई....
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9:55 PM
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Labels: Emotions...
Monday, March 12, 2007
तुमने भी उम्मीद कहां की......
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9:26 PM
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Labels: कुछ कहती है नायिका..
Wednesday, March 7, 2007
हां नारी हूं मैं.. पर क्या है मेरा स्वरूप...
फ़िर लगता है नहीं इन सबसे बढकर पहले एक नारी हूं मैं.. नारी 'शक्ति सृजन की, तो शक्ति विध्वंस की भी'... दुर्गा का रूप हूं.. अंबा भी... रूप मुझमें काली और चंडिका का भी.... जीवनदायिनी मां का स्वरूप हूं... 'कौशल्या और यशोदा' भी मुझमें... जन्म दिया 'राम-कृष्ण' को मैंने.... तो 'कैकसी' का भी रूप मुझमें.. 'रावण' भी पनपा था मुझसे... प्रेयसी-प्रेमिका हूं 'अल्हङ राधा सी'.... तो रूप मुझमें रति का, रंभा का भी... 'सीता-सावित्री' बन धर्म निभाया मैंने... तो 'द्रौपदी, बन नींव डाली 'महाभारत' की..... रणभूमि में भी उतरी हूं तलवार लेकर.. संभाला है देश भी... हिमालय तक जा पहूंची हूं.... नापा है अंतरिक्ष भी.... खेल सकती हूं सागर से.. छू सकती हूं आकाश भी...
पर कौन समझा है मेरे इन रूपों को, मेरी इस शक्ति को... शायद स्वयं मैं भी नहीं... ये सत्य नहीं इस देश की आधी आबादी का... बस एक आवरण है मेरी वासत्विकता का.. मुझे पूजनीय कहा जाता रहा.. मूरत बना मंदिरों में बिठाया गया... पर क्या मैं सचमुच पूजी गई?.......
आज भी गर्भ में मेरी आहट या मेरा जन्म विचलित कर देता है मेरे जनक को... आज भी घिरी हूं अशिक्षा के अंधकार से.... जाने कितनी बार जली हूं अग्नि में जीवित या जलायी गई .. कभी 'दहेज की बलि वेदी' पर कभी 'सती' बनाकर... बस सौदर्य की उपमा या भोग की वस्तु ही माना गया मुझे.... तस्वीरों में उकेरी मेरी देह की कलाकृतियाओं पर मंत्रमुग्ध हैं सब... पर जब भी मैने अपने अस्तित्व के लिये नियम तोङे मेरे चरित्र पर सवाल उठाया गया... मेरी तस्वीरों का ModernArt पसंद है .. मेरा पाश्चात्यानुकरण अश्लील माना गया....आज भी बाज़ार गर्म है मेरी देह के क्रय-विक्रय का...
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11:09 PM
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Labels: कुछ प्रश्न.. आप भी कुछ कहें..
Monday, March 5, 2007
कई दिन हुये तुमने कोई बात नहीं की...
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5:44 PM
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Labels: कुछ कहा है तुम्हारे लिये..
Thursday, March 1, 2007
नहीं बोलूंगी कान्हा तोसे..
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11:08 PM
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Labels: य़े सांवरे कान्हा के लिये...










